दार्शनिक आधारनिर्जला एकादशी कब मनाई जाती है?यह व्रत ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में आता है, जब भीषण गर्मी पड़ रही होती है।#निर्जला एकादशी#ज्येष्ठ मास#ग्रीष्म ऋतु
प्रायश्चितगलती से एकादशी का व्रत टूट जाए तो क्या करें?व्रत टूट जाने पर घबराएं नहीं। भगवान विष्णु के 'अच्युत' नाम का ध्यान करें और 11 माला विष्णु मंत्र का जाप कर दान दें। सबसे बड़ा प्रायश्चित है कि अगली 'निर्जला एकादशी' का व्रत पूरी निष्ठा से रखें।#व्रत भंग#प्रायश्चित#निर्जला एकादशी
व्रत एवं उपवासनिर्जला एकादशी व्रत की विधिनिर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को होती है। इसमें पूरे दिन जल और अन्न दोनों त्यागे जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, पीले वस्त्र, विष्णु पूजा, तुलसी, जल दान और रात्रि जागरण इसके मुख्य अंग हैं। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।#निर्जला एकादशी#भीमसेनी एकादशी#ज्येष्ठ एकादशी
व्रत विधिनिर्जला एकादशी व्रत कैसे रखें?निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (भीमसेनी)। सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक जल भी वर्जित। विष्णु पूजा + जप + रात्रि जागरण। द्वादशी में पारण (तुलसी जल → भोजन)। जलदान-पंखा-छाता दान। फल = 24 एकादशियों बराबर। सबसे कठोर व्रत।#निर्जला एकादशी#भीमसेनी एकादशी#ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी