विस्तृत उत्तर
धर्मशास्त्र कहते हैं कि यदि अज्ञानतावश या शारीरिक कमजोरी के कारण व्रत भंग हो जाए, तो साधक को घबराना या भयभीत नहीं होना चाहिए। इसके प्रायश्चित के लिए भगवान विष्णु के 'अच्युत' नाम का जप करें। विष्णु जी के द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) की कम से कम 11 माला का जप करें और अपनी क्षमता अनुसार किसी सुपात्र को दान दें। इसके अलावा, अगली आने वाली 'निर्जला एकादशी' का पूरे संकल्प के साथ व्रत रखना व्रत भंग का सबसे प्रभावी प्रायश्चित माना गया है।




