विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में महापापी को मुक्ति मिलने के बारे में दोनों पक्ष — कठोरता और करुणा — दोनों का वर्णन है।
मुक्ति कठिन किंतु असंभव नहीं — गरुड़ पुराण में वृषोत्सर्ग के बारे में कहा गया है — 'मित्रद्रोही, कृतघ्न, सुरापान करने वाला, गुरुपत्नीगामी, ब्रह्महत्यारा और स्वर्ण की चोरी करने वाला भी वृषोत्सर्ग से पापमुक्त हो जाता है।' यह महापापी के लिए भी मुक्ति की संभावना बताता है।
भूमिदान से ब्रह्महत्या का प्रायश्चित — 'राज्यसंचालन में होने वाला महापाप केवल भूमिदान से विलीन होता है।'
मृत्युकाल में भगवन्नाम — गरुड़ पुराण में — 'अगर कोई मृत्यु के समय भगवान का नाम लेता है तो वो मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है।' यह महापापी के लिए भी उपलब्ध अवसर है।
परिजनों का योगदान — 'रौरव आदि नरकों में यातना पा रहे पूर्वज वृषोत्सर्ग और गया-श्राद्ध से तर जाते हैं।'
संक्षेप — मुक्ति संभव है, परंतु इसके लिए असाधारण प्रायश्चित, भक्ति या परिजनों का विशेष पुण्य-कर्म आवश्यक है।





