विस्तृत उत्तर
मंत्रों की शक्ति उनकी ध्वनि और उच्चारण (व्याकरण) में निहित होती है। गलत उच्चारण से मंत्र का अर्थ बदल सकता है और इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। यदि अज्ञानतावश गलत उच्चारण हो जाए, तो शास्त्रों में इसके प्रायश्चित का विधान है।
जप के अंत में हमेशा क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए—'आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥' इसके अतिरिक्त, जप पूर्ण होने के बाद भगवान विष्णु के 'ॐ विष्णवे नमः' या भगवान शिव के 'ॐ नमः शिवाय' का १०८ बार मानसिक जप करने से उच्चारण में हुई सभी त्रुटियां और दोष समाप्त हो जाते हैं। भविष्य में सुधार के लिए मंत्र को पहले किसी योग्य गुरु या विद्वान से सुनकर कंठस्थ (याद) करना चाहिए, और शुरुआत में धीमी गति से उपांशु (फुसफुसाते हुए) जप करना चाहिए।





