विस्तृत उत्तर
मंत्र जप पुनः आरंभ:
- 1कोई कठोर 'दंड' नहीं: देवता = क्षमाशील। लंबे अंतराल बाद भी पुनः आरंभ = स्वागत।
- 2नया संकल्प: शुभ दिन (सोमवार/शुक्रवार/एकादशी/नवरात्रि) चुनें। नया संकल्प लें।
- 3माला शुद्धि: पुरानी माला गंगाजल + मंत्र 108 बार = पुनः अभिमंत्रित।
- 4क्षमा प्रार्थना: 'हे [इष्ट देवता], मैंने जप छोड़ दिया था — क्षमा करें, पुनः आरंभ।'
- 5धीरे-धीरे: पहले 108/दिन → फिर बढ़ाएं। एकदम सवा लाख नहीं।
सार: कभी भी पुनः शुरू कर सकते हैं। 'देर आए दुरुस्त आए।' ईश्वर = माता-पिता — संतान लौटे = प्रसन्नता।





