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मंत्र जप नियम📜 मंत्र शास्त्र, योग शास्त्र1 मिनट पठन

मंत्र अनुष्ठान के दौरान ब्रह्मचर्य पालन क्यों आवश्यक है?

संक्षिप्त उत्तर

ऊर्जा ऊर्ध्वगमन (ओजस → मंत्र शक्ति)। मन शुद्धि → एकाग्रता। अथर्ववेद: 'ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युम् अपाघ्नत।' अनुष्ठान काल अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

अनुष्ठान में ब्रह्मचर्य अनिवार्य:

  1. 1ऊर्जा ऊर्ध्वगमन: वीर्य = ओजस = आध्यात्मिक ऊर्जा। ब्रह्मचर्य = ऊर्जा ऊपर → मंत्र शक्ति ग्रहण। काम = ऊर्जा नीचे → मंत्र निष्फल।
  2. 2मन शुद्धि: काम वासना = मन अशुद्ध → एकाग्रता भंग → मंत्र शक्ति कम।
  3. 3शास्त्रीय नियम: 'ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत' (अथर्ववेद) — ब्रह्मचर्य तप से देवताओं ने मृत्यु जीती।
  4. 4देवता कृपा: शुद्ध साधक = देवता शीघ्र प्रसन्न।

अवधि: अनुष्ठान काल (9/21/40 दिन) = अनिवार्य। दैनिक जप = अनुशंसित।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, योग शास्त्र
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