विस्तृत उत्तर
अनुष्ठान में ब्रह्मचर्य अनिवार्य:
- 1ऊर्जा ऊर्ध्वगमन: वीर्य = ओजस = आध्यात्मिक ऊर्जा। ब्रह्मचर्य = ऊर्जा ऊपर → मंत्र शक्ति ग्रहण। काम = ऊर्जा नीचे → मंत्र निष्फल।
- 2मन शुद्धि: काम वासना = मन अशुद्ध → एकाग्रता भंग → मंत्र शक्ति कम।
- 3शास्त्रीय नियम: 'ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत' (अथर्ववेद) — ब्रह्मचर्य तप से देवताओं ने मृत्यु जीती।
- 4देवता कृपा: शुद्ध साधक = देवता शीघ्र प्रसन्न।
अवधि: अनुष्ठान काल (9/21/40 दिन) = अनिवार्य। दैनिक जप = अनुशंसित।





