विस्तृत उत्तर
रीढ़ सीधी = जप/ध्यान का मूल नियम:
कारण
- 1कुंडलिनी मार्ग: कुंडलिनी = मूलाधार → सुषुम्ना नाड़ी (रीढ़ के मध्य) → सहस्रार। रीढ़ सीधी = मार्ग खुला।
- 2प्राण प्रवाह: इड़ा+पिंगला+सुषुम्ना = रीढ़ के साथ। सीधी = प्रवाह निर्बाध।
- 37 चक्र: मूलाधार→सहस्रार = रीढ़ पर। सीधी = चक्र aligned।
- 4श्वास: सीधी रीढ़ = फेफड़े खुले = गहरी श्वास = अधिक प्राण।
- 5एकाग्रता: झुकी = नींद/आलस्य। सीधी = alert + focused।
कैसे: सुखासन/पद्मासन/कुर्सी — रीढ़ सीधी, कंधे खुले, ठोड़ी समानांतर। जबरदस्ती कठोर नहीं = सहज सीधी।





