ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
मंत्र जप नियम📜 योग शास्त्र, हठ योग प्रदीपिका1 मिनट पठन

मंत्र जप में रीढ़ की हड्डी सीधी रखना क्यों जरूरी है?

संक्षिप्त उत्तर

कुंडलिनी मार्ग (सुषुम्ना = रीढ़), प्राण प्रवाह निर्बाध, 7 चक्र aligned, श्वास गहरी (फेफड़े खुले), एकाग्रता (alert)। सुखासन/पद्मासन — सहज सीधी, कठोर नहीं।

📖

विस्तृत उत्तर

रीढ़ सीधी = जप/ध्यान का मूल नियम:

कारण

  1. 1कुंडलिनी मार्ग: कुंडलिनी = मूलाधार → सुषुम्ना नाड़ी (रीढ़ के मध्य) → सहस्रार। रीढ़ सीधी = मार्ग खुला।
  2. 2प्राण प्रवाह: इड़ा+पिंगला+सुषुम्ना = रीढ़ के साथ। सीधी = प्रवाह निर्बाध।
  3. 37 चक्र: मूलाधार→सहस्रार = रीढ़ पर। सीधी = चक्र aligned।
  4. 4श्वास: सीधी रीढ़ = फेफड़े खुले = गहरी श्वास = अधिक प्राण।
  5. 5एकाग्रता: झुकी = नींद/आलस्य। सीधी = alert + focused।

कैसे: सुखासन/पद्मासन/कुर्सी — रीढ़ सीधी, कंधे खुले, ठोड़ी समानांतर। जबरदस्ती कठोर नहीं = सहज सीधी।

📜
शास्त्रीय स्रोत
योग शास्त्र, हठ योग प्रदीपिका
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

रीढ़सीधीजरूरीकारणकुंडलिनी

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

मंत्र जप में रीढ़ की हड्डी सीधी रखना क्यों जरूरी है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको मंत्र जप नियम से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर योग शास्त्र, हठ योग प्रदीपिका पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।