विस्तृत उत्तर
अंगूठा + मध्यमा = मंत्र जप की सही मुद्रा:
अंगूठा = ब्रह्म/अग्नि
अंगूठा = परमात्मा/ब्रह्म तत्व। अग्नि तत्व = ऊर्जा। मंत्र शक्ति अंगूठे से प्रवाहित।
मध्यमा = आकाश तत्व
मध्यमा = आकाश (शून्य) — सबसे शुद्ध तत्व। अग्नि + आकाश = शक्ति + शून्यता = ध्यान।
योग मुद्रा: अंगूठा + मध्यमा = 'मंत्र मुद्रा' — मंत्र ऊर्जा शरीर में संचारित।
5 अंगुलियां = 5 तत्व
- ▸अंगूठा = अग्नि
- ▸तर्जनी = वायु (चंचल — वर्जित)
- ▸मध्यमा = आकाश (शुद्ध — शुभ)
- ▸अनामिका = पृथ्वी
- ▸कनिष्ठिका = जल
अनामिका भी मान्य: कुछ परंपराओं में अंगूठा + अनामिका (विष्णु/देवी जप)।





