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मंत्र जप नियम📜 मंत्र शास्त्र, योग शास्त्र1 मिनट पठन

माला जप में अंगूठे और मध्यमा से ही मनके क्यों फेरते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

अंगूठा = अग्नि/ब्रह्म। मध्यमा = आकाश (शुद्धतम)। अग्नि + आकाश = शक्ति + शून्यता। तर्जनी = वायु (चंचल — वर्जित)। 'मंत्र मुद्रा' = ऊर्जा संचार।

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विस्तृत उत्तर

अंगूठा + मध्यमा = मंत्र जप की सही मुद्रा:

अंगूठा = ब्रह्म/अग्नि

अंगूठा = परमात्मा/ब्रह्म तत्व। अग्नि तत्व = ऊर्जा। मंत्र शक्ति अंगूठे से प्रवाहित।

मध्यमा = आकाश तत्व

मध्यमा = आकाश (शून्य) — सबसे शुद्ध तत्व। अग्नि + आकाश = शक्ति + शून्यता = ध्यान।

योग मुद्रा: अंगूठा + मध्यमा = 'मंत्र मुद्रा' — मंत्र ऊर्जा शरीर में संचारित।

5 अंगुलियां = 5 तत्व

  • अंगूठा = अग्नि
  • तर्जनी = वायु (चंचल — वर्जित)
  • मध्यमा = आकाश (शुद्ध — शुभ)
  • अनामिका = पृथ्वी
  • कनिष्ठिका = जल

अनामिका भी मान्य: कुछ परंपराओं में अंगूठा + अनामिका (विष्णु/देवी जप)।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, योग शास्त्र
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