विस्तृत उत्तर
सुमेरु (मेरु) = माला का सबसे बड़ा मनका — गुरु/ईश्वर प्रतीक:
नियम: जप करते समय 108 मनके पूरे होने पर सुमेरु (बड़ा दाना) आ जाए — उसे लांघें नहीं (cross न करें)। माला को उल्टा मोड़कर वापस जपना शुरू करें।
दोष (मंत्र शास्त्र)
- ▸सुमेरु = गुरु/ब्रह्म। लांघना = गुरु/ब्रह्म का अपमान।
- ▸जप का फल नष्ट हो सकता है (कुछ परंपरा)।
- ▸मंत्र शक्ति क्षीण।
क्या करें
- 1108वें मनके पर पहुंचें → माला उल्टी करें → पुनः 108 जपें (सुमेरु बिना लांघे)।
- 2अनजाने में लांघ गए → 'ॐ' 3 बार जपें → आगे जारी। घबराएं नहीं।
सार: सुमेरु = गुरु — कभी न लांघें। माला उल्टा मोड़ें।





