विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती का पाठ अधूरा छोड़ना अशुभ माना गया है:
प्रभाव
- ▸अनुष्ठान का फल प्राप्त नहीं होता।
- ▸मंत्र शक्ति अपूर्ण रहती है — कुछ परंपराओं में विपरीत प्रभाव की मान्यता।
- ▸देवी रुष्ट हो सकती हैं (विशेषतः शारदीय नवरात्रि — देवी उग्र स्वरूप में)।
किन्तु
- ▸वास्तविक कारण (गंभीर बीमारी, आपातकाल, अशुद्धता) से छूट जाए तो देवी क्षमाशील हैं।
- ▸देवी = जगदम्बा/माता — माता अपनी संतान को दंडित नहीं करती।
प्रायश्चित
- 1क्षमा प्रार्थना — 'अपराध क्षमापन स्तोत्र' (देवी)।
- 2जहां छूटा वहीं से पुनः आरंभ (कुछ परंपरा)।
- 3पूरा पाठ पुनः आरंभ (कठोर नियम)।
- 4नवार्ण मंत्र ('ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे') 108 बार जप — क्षतिपूर्ति।
- 5गुरु/विद्वान से परामर्श।
सार: पूर्ण करने का प्रयास करें — किन्तु अनावश्यक भय न रखें। माता = क्षमाशील।





