विस्तृत उत्तर
कीलक स्तोत्र = दुर्गा सप्तशती के छह अंगों में तीसरा:
अर्थ: 'कीलक' = चाबी/ताला खोलने वाला। सप्तशती के मंत्र 'locked' (शापित) हैं — कीलक = unlock करता है।
प्रभाव
- 1फल प्राप्ति: बिना कीलक = सप्तशती पाठ का फल अप्राप्त/अपूर्ण। कीलक = फल की गारंटी।
- 2शाप मुक्ति: ब्रह्मा/वशिष्ठ/विश्वामित्र शाप → कीलक = शाप तोड़ना।
- 3मंत्र शक्ति: कीलक पाठ = मंत्रों की पूर्ण शक्ति जागृत।
- 4सुरक्षा: पाठक को साधना के दौरान आने वाली बाधाओं से रक्षा।
क्रम (AajTak verified): शापोद्धार → कवच (बीज/रक्षा) → अर्गला (शक्ति/बाधा) → कीलक (चाबी/फल) → 13 अध्याय।
विकल्प: सिद्ध कुंजिका स्तोत्र पढ़ने पर कवच-अर्गला-कीलक की आवश्यकता नहीं (शास्त्र मान्यता)।





