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विस्तृत उत्तर
यदि अज्ञानतावश, भूल से या बीमारी के कारण एकादशी का व्रत भंग हो जाए (जैसे अन्न या जल ग्रहण कर लें), तो शास्त्रों में इसका प्रायश्चित बताया गया है। ऐसी स्थिति में साधक को घबराने के बजाय भगवान विष्णु के 'अष्टाक्षर मंत्र' (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का 108 या 1008 बार जाप करना चाहिए और पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान से क्षमा याचना करनी चाहिए।
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