विस्तृत उत्तर
श्राद्ध के अंत में भगवान विष्णु से पूजा या विधि में हुई त्रुटि के लिए क्षमा माँगी जाती है और कर्म उन्हें समर्पित किया जाता है।
एकादशी श्राद्ध में क्षमा याचना क्यों करें को संदर्भ सहित समझें
एकादशी श्राद्ध में क्षमा याचना क्यों करें का सबसे सीधा सार यह है: कर्म की त्रुटि क्षमा के लिए।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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स्वर्लोक में श्राद्ध का फल गंधर्व, नाग और पशु योनि में कैसे मिलता है?
गरुड़ पुराण के अनुसार गंधर्व योनि में श्राद्ध कलाओं के रूप में, नाग योनि में वायु के रूप में और पशु योनि में घास के रूप में मिलता है।
श्राद्ध और तर्पण का स्वर्लोक से क्या संबंध है?
पृथ्वी पर श्रद्धा से किया गया श्राद्ध-तर्पण स्वर्लोक में पूर्वजों को 'अमृत' के रूप में प्राप्त होता है। स्वर्ग में जो जैसा है उसे उसके अनुरूप श्राद्ध का फल मिलता है।
श्राद्ध और पिंडदान का भुवर्लोक से क्या संबंध है?
भुवर्लोक में भटक रही प्रेत-आत्माओं को श्राद्ध और पिंडदान से सूक्ष्म ऊर्जा मिलती है जिससे वे इस कष्टदायी लोक को पार करके पितृलोक तक पहुँच सकती हैं।
सरस्वती पूजा में आरती कैसे करते हैं?
आरती: कर्पूर जलाकर देवी की आरती करें। मंत्र: 'कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रदीपितम्...' अंत में हाथ में पुष्प लेकर 'अनेन पूजनेन...' से क्षमा याचना करें। आरती = समर्पण की पराकाष्ठा।
व्रत गलती से टूट जाए तो शास्त्रों में क्या प्रायश्चित है?
गलती से व्रत टूट जाने पर भगवान विष्णु से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
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