विस्तृत उत्तर
एक दिन कौण्डिन्य ऋषि ने सुशीला के हाथ में वह धागा देखकर उसे अंधविश्वास माना और तोड़कर आग में जला दिया। यह साक्षात भगवान अनन्त का अपमान था। इसके फलस्वरूप ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई और वे दरिद्र हो गए। भूल का एहसास होने पर वे 14 साल तक वन में भटके, तब भगवान ने उन्हें दर्शन दिए और व्रत का उपाय बताया।





