विस्तृत उत्तर
सुमन्त ब्राह्मण की धार्मिक पुत्री सुशीला का विवाह कौण्डिन्य ऋषि से हुआ था। मार्ग में यमुना तट पर सुशीला ने लाल वस्त्र पहनी स्त्रियों को अनंत व्रत करते देखा। सुशीला ने भी वह व्रत किया और 14 गांठों वाला धागा बांध लिया, जिसके प्रभाव से ऋषि का आश्रम अपार वैभव से भर गया। यही इस व्रत की मूल कथा है।





