विस्तृत उत्तर
शिवपुराण (शतरुद्र संहिता) के अनुसार सृष्टि के आरंभ में भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का विवाद हुआ। वेदों ने भगवान शिव को ही परब्रह्म घोषित किया, किंतु अहंकारग्रस्त ब्रह्मा जी के पांचवें मुख ने शिव की निंदा की। इस मिथ्या अभिमान और शिव निंदा को देखकर भगवान शिव के क्रोध से एक भीषण ज्योतिपुंज प्रकट हुआ, जिससे एक विकराल, श्याम वर्ण, त्रिनेत्रधारी पुरुष की उत्पत्ति हुई, जिन्हें 'कालभैरव' कहा गया।





