विस्तृत उत्तर
पौराणिक आख्यानों के अनुसार, एकादशी स्वयं एक शक्ति के रूप में प्रकट हुई थीं, जिनका प्रादुर्भाव भगवान विष्णु की ग्यारहवीं इंद्रिय अर्थात् मन से हुआ था। इस दिव्य शक्ति का उदय 'मुर' नामक भयंकर दैत्य का वध करने हेतु हुआ था, जो देवताओं के लिए संकट का कारण बना हुआ था। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागे और उन्होंने इस देवी के शौर्य को देखा, तो उन्होंने इसे 'एकादशी' नाम दिया और वरदान दिया कि जो भी इस दिन निराहार रहकर उपासना करेगा, वह समस्त पापों से मुक्त होगा।




