विस्तृत उत्तर
कैलाश पर चौसर खेलते समय भगवान शिव ने घास (कुश) से एक पुतला बनाकर उसे जीवित किया ताकि वह हार-जीत का फैसला कर सके। माता पार्वती के बार-बार जीतने पर भी उस बालक ने पक्षपात करते हुए कहा कि 'शिव जी विजयी हुए हैं'। इस असत्य भाषण पर माता पार्वती ने कुपित होकर उसे आजीवन लंगड़ा होने और दलदल में पड़े रहने का श्राप दे दिया।





