विस्तृत उत्तर
श्राप से पीड़ित उस बालक ने नाग कन्याओं के निर्देशानुसार चैत्र/वैशाख मास की 'संकष्टी चतुर्थी' (विकट संकष्टी) का व्रत किया। उसने लगातार 21 दिनों तक दिन भर निराहार रहकर चंद्रोदय पर भगवान गणेश की पूजा की। इस सच्ची भक्ति से साक्षात् विघ्नहर्ता गणेश प्रकट हुए और वरदान देकर उसके पैरों की शक्ति लौटा दी।





