विस्तृत उत्तर
गणेश पुराण की कथा के अनुसार, देवराज इन्द्र का दिव्य विमान आकाश मार्ग से राजा शूरसेन की नगरी (सहस्रपुर) के ऊपर से गुजर रहा था। तभी राज्य में खड़े एक अत्यंत महापापी व्यक्ति की दूषित और पापमयी कुदृष्टि (दृष्टि-दोष) उस विमान पर पड़ गई। पापी की नज़र पड़ते ही विमान का सारा पुण्य नष्ट हो गया, वह शक्तिहीन होकर स्तंभित हुआ और सीधा भूमि पर आ गिरा।





