विस्तृत उत्तर
सृष्टि को नागों के भय से मुक्त कराने के लिए परमपिता ब्रह्मा जी की प्रेरणा से महर्षि कश्यप ने अपने तपोबल और मन की संकल्प शक्ति का आह्वान किया। उनके मन से एक अत्यंत तेजस्वी और दिव्य कन्या उत्पन्न हुई, जिसे 'मनसा' कहा गया। पुराणों और कल्प-भेद के अनुसार एक अन्य कथा यह भी है कि नागराज वासुकि की माता द्वारा बनाई गई एक सुंदर कन्या की मूर्ति में भगवान शिव के दिव्य तेज और वीर्य के स्पर्श से जान आ गई थी, और वह सजीव होकर मनसा देवी के रूप में प्रकट हुई थीं।





