विस्तृत उत्तर
भविष्य पुराण और नृसिंह पुराण के अनुसार, रामायण काल में जब वानर सेना माता सीता को खोजते हुए सौ योजन विशाल समुद्र के तट पर निराश खड़ी थी, तब जटायु के भाई संपाती ने हनुमान जी को यह व्रत करने का उपदेश दिया था। इस व्रत के अमोघ प्रभाव से हनुमान जी के भीतर अपार शक्ति का संचार हुआ और उन्होंने बिना किसी विघ्न के समुद्र लांघकर माता सीता की खोज की।





