विस्तृत उत्तर
कालिका पुराण और कृत्तिवास रामायण के अनुसार, भगवान राम ने रावण पर विजय पाने के लिए शरद् ऋतु में देवी की 'अकाल' (असमय) आराधना की थी, जिसे 'अकाल बोधन' कहा जाता है। उन्होंने 108 नीलकमल अर्पित करने का संकल्प लिया था। देवी ने परीक्षा लेने के लिए एक कमल छिपा दिया। तब राम ने अपना नेत्र (कमल नयन) अर्पित करने का प्रयास किया, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। यह ऐतिहासिक घटना अष्टमी और नवमी के 'संधि काल' में हुई थी, जिसकी स्मृति में बंगाल व पूर्वी भारत में अष्टमी का विशेष महत्व है।





