विस्तृत उत्तर
सावित्री-सत्यवान की कथा महाभारत के वन पर्व (अध्याय 293-299) में मार्कण्डेय ऋषि ने युधिष्ठिर को सुनाई।
कथा
सावित्री (राजकुमारी, अश्वपति की पुत्री) ने सत्यवान से विवाह किया जबकि नारद ने बताया था कि सत्यवान की आयु केवल 1 वर्ष शेष है।
निर्धारित दिन सत्यवान वन में लकड़ी काटते समय मूर्छित हो गए। यमराज स्वयं उनकी आत्मा को पाश में बांधकर ले जाने आए। सावित्री ने यमराज का पीछा किया।
यमराज से संवाद और वरदान
- 1प्रथम वर — ससुर (द्युमत्सेन) की दृष्टि वापस आए — यम ने दिया।
- 2द्वितीय वर — ससुर को खोया राज्य वापस मिले — यम ने दिया।
- 3तृतीय वर — पिता (अश्वपति) को पुत्र प्राप्ति — यम ने दिया।
- 4चतुर्थ वर — सावित्री को स्वयं संतान प्राप्ति — यम ने दिया।
- 5पांचवां वर/तर्क — सावित्री ने कहा — 'आपने मुझे संतान का वर दिया, परंतु मैं पतिव्रता हूं — पति (सत्यवान) बिना संतान कैसे? मेरी संतान सत्यवान से ही होगी।'
यमराज सावित्री की बुद्धि, भक्ति और दृढ़ता से प्रसन्न हुए और सत्यवान को जीवनदान दिया।
शिक्षाएं
- 1प्रेम + बुद्धि — सावित्री ने भावुकता नहीं, बुद्धि और तर्क से यमराज को परास्त किया।
- 2दृढ़ संकल्प — स्वयं मृत्यु (यमराज) भी दृढ़ संकल्प के आगे झुकी।
- 3नारी शक्ति — स्त्री की शक्ति (बुद्धि, प्रेम, दृढ़ता) मृत्यु को भी जीत सकती है।
- 4वट सावित्री व्रत — इसी कथा पर आधारित — ज्येष्ठ अमावस्या को विवाहित स्त्रियां पति की दीर्घायु हेतु करती हैं।





