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पौराणिक कथा📜 शिव पुराण — कुमार खंड, स्कंद पुराण, गणेश पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण4 मिनट पठन

गणेश जी की कथा क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से किया। शिव जी ने अनजाने में उनका सिर काट दिया, फिर हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया और 'प्रथम पूज्य' घोषित किया। माता-पिता की परिक्रमा से प्रथम पूज्य का वरदान मिला। परशुराम से युद्ध में एक दाँत टूटने से 'एकदंत' नाम पड़ा।

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विस्तृत उत्तर

गणेश जी की कथाएं शिव पुराण, गणेश पुराण, स्कंद पुराण और ब्रह्म वैवर्त पुराण में विस्तार से वर्णित हैं:

1गणेश जी की जन्म कथा (शिव पुराण — सर्वाधिक प्रमाणित)

एक बार माता पार्वती स्नान करने से पूर्व अपने शरीर के मैल से एक बालक बनाया और उसमें प्राण फूंके। उन्होंने उस बालक को द्वार पर पहरेदार बनाकर भीतर चली गईं।

कुछ समय बाद भगवान शिव द्वार पर आए। बालक ने उन्हें नहीं पहचाना और अंदर जाने से रोक दिया। भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से बालक का शीश काट दिया।

जब माता पार्वती बाहर आईं और यह देखा तो वे विलाप करने लगीं। शिव जी को तब पूरी बात समझ में आई। उन्होंने गणों को उत्तर दिशा में जाकर सर्वप्रथम जो प्राणी मिले उसका सिर काटकर लाने का आदेश दिया।

गण उत्तर दिशा में गए और उन्हें एक हाथी का बच्चा मिला जो उत्तर दिशा में सोया था। उन्होंने उस हाथी का सिर काटकर लाया। भगवान शिव ने उस हाथी के सिर को बालक के धड़ पर लगा दिया और उसे पुनर्जीवित कर दिया।

भगवान शिव ने घोषणा की — 'यह गण का पति है — गणपति। सभी देवता और मनुष्य किसी भी कार्य के आरंभ में सर्वप्रथम इसी की पूजा करेंगे।'

2प्रथम पूज्य का वरदान

गणेश पुराण में वर्णित है कि जब सभी देवता ब्रह्मा जी के पास गए और पूछा — 'प्रथम पूज्य कौन हो?' तब ब्रह्मा जी ने कहा — 'जो पूरी पृथ्वी की परिक्रमा पहले करेगा वह प्रथम पूज्य होगा।'

कार्तिकेय मोर पर सवार होकर पृथ्वी परिक्रमा के लिए निकले। गणेश जी ने विचार किया — 'माता-पिता ही समस्त संसार हैं।' उन्होंने माता पार्वती और पिता शिव की तीन बार परिक्रमा की। ब्रह्मा जी अत्यंत प्रसन्न हुए और गणेश जी को प्रथम पूज्य घोषित किया।

3एकदंत की कथा

परशुराम एक बार कैलाश पर शिव जी से मिलने आए। द्वार पर गणेश जी थे। दोनों में युद्ध हुआ। परशुराम ने अपना परशु (फरसा) फेंका। गणेश जी ने जान-बूझकर वह परशु अपने एक दाँत पर झेला — क्योंकि परशु उनके पिता शिव का दिया हुआ था, उसका अपमान नहीं होना चाहिए था। इस प्रकार गणेश जी 'एकदंत' कहलाए।

4गणेश जी और चंद्रमा का शाप

गणेश पुराण के अनुसार एक बार चंद्रमा ने गणेश जी के हाथी के मुख पर हँसी की — तब गणेश जी ने चंद्रमा को शाप दिया। इसीलिए गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखना वर्जित है।

5गणेश जी का मूषक वाहन

स्कंद पुराण में वर्णित है कि गजमुखासुर नामक दैत्य था जो सभी को परेशान करता था। गणेश जी ने उससे युद्ध किया और उसे वश में कर अपना वाहन बनाया — यही मूषक (चूहा) है।

गणेश जी के जन्म का भाद्रपद चतुर्थी से संबंध

शिव पुराण के अनुसार गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था — इसीलिए यह तिथि 'गणेश चतुर्थी' के रूप में मनाई जाती है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण — कुमार खंड, स्कंद पुराण, गणेश पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण
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