विस्तृत उत्तर
मार्कंडेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, जब महिषासुर ने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया, तब महामाया का प्राकट्य हुआ। युद्ध के दौरान अष्टमी तिथि को देवी ने अपने रौद्र रूप का प्रदर्शन किया। इसी दिन देवी (चामुंडा/कालरात्रि) ने चंड-मुंड और रक्तबीज का वध किया था। रक्तबीज के रक्त की एक बूंद गिरने से नया राक्षस बन जाता था, इसलिए वध के समय देवी ने अपनी जिह्वा को फैलाकर उसके रक्त की एक-एक बूंद को पृथ्वी पर गिरने से पहले ही पी लिया था। इस रौद्र विजय के उपलक्ष्य में अष्टमी को 'वीराष्टमी' (Vira Ashtami) भी कहा जाता है।





