विस्तृत उत्तर
भगवान शिव से अलौकिक ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात, देवी मनसा नागलोक की रानी, नागराज वासुकि की भगिनी (बहन) और समस्त सर्प-जाति की माता के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। चूँकि उनका प्राकट्य ही पृथ्वी पर सर्पों के आतंक को शांत करने और प्राणियों को विष के भय से मुक्ति दिलाने के लिए हुआ था, इसलिए वे नागों की पूर्ण अधिष्ठात्री देवी या 'नागमाता' के रूप में पूजी जाती हैं।





