विस्तृत उत्तर
योगिनी' शब्द मूल रूप से संस्कृत की 'योग' धातु से बना है, जिसका अर्थ है 'मिलाना' या 'जोड़ना'। आध्यात्मिक दृष्टि से यह एकादशी साधक को सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्त करके भगवान विष्णु के चरणों से जोड़ने का कार्य करती है। दार्शनिक स्तर पर यह 'संयम' और 'साधना' के मेल को दर्शाती है, जिससे व्यक्ति एक योगी के समान इंद्रियों पर काबू पा लेता है। तंत्र और आयुर्वेद में इसे शरीर की 'योगिनी' नामक नाड़ियों के शोधन की प्रक्रिया भी माना गया है।





