विस्तृत उत्तर
कैलाश पर्वत पर रहकर देवी मनसा ने भगवान शिव (नीलकंठ) से अलौकिक ज्ञान प्राप्त किया था। इसी दौरान उन्होंने शिवजी से हलाहल विष को 'अमृत' में बदलने की अद्भुत और गुप्त विद्या भी सीखी। चूँकि वे किसी भी प्रकार के विष (जहर) के प्रभाव को हरने (नष्ट करने) और उसे अमृत बनाने की शक्ति रखती हैं, तथा नागों की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए उन्हें 'विषहरी' (विष को हरने वाली) कहा जाता है।





