विस्तृत उत्तर
शिव और स्कंद पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले भयंकर 'हलाहल' विष को भगवान शिव ने त्रयोदशी के दिन इसी 'प्रदोष काल' में पीकर सृष्टि को बचाया था। विष पीने के बाद उन्हें कष्ट नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने उस नकारात्मक ऊर्जा को परमानंद में बदल दिया और 'आनंद-तांडव' किया। इस समय शिव सपरिवार त्रिलोक भ्रमण करते हैं, इसलिए केवल शिव की पूजा से ही सभी देवता स्वतः प्रसन्न हो जाते हैं।





