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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन से निकला उच्चैश्रवा घोड़ा दैत्यराज बलि को मिला। यह घोड़ा अत्यंत दिव्य, तेजस्वी और श्वेत वर्ण का बताया गया है। इसे घोड़ों में श्रेष्ठ माना जाता है। समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने देवताओं को पहले ही समझाया था कि रत्नों को लेकर लोभ या विवाद न करें। इसलिए जब उच्चैश्रवा घोड़ा निकला और असुरों ने उसे लेना चाहा, तो देवताओं ने विरोध नहीं किया। बलि ने उसे ग्रहण किया। यह प्रसंग दिखाता है कि मंथन में निकली हर वस्तु अंतिम लक्ष्य नहीं थी; वास्तविक लक्ष्य अमृत था।
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