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शिव स्वरूप📜 शिव पुराण, चिदंबरम मंदिर परंपरा, तमिल शैव आगम2 मिनट पठन

शिव जी का नटराज रूप क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

नटराज शिव का नृत्य स्वरूप है। डमरू (सृष्टि), अग्नि (संहार), अभय मुद्रा (रक्षा), माया को पाँव से दबाना और उठा पाँव (मोक्ष) — ये पाँच ब्रह्मांडीय क्रियाओं के प्रतीक हैं। CERN में भी नटराज की प्रतिमा है।

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विस्तृत उत्तर

नटराज शिव का नृत्यमुद्रा स्वरूप है — यह भारतीय कला और दर्शन का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।

नटराज का अर्थ

  • 'नट' = नर्तक, 'राज' = राजा
  • शिव — नृत्य के स्वामी, सृष्टि के नर्तक

आनंद तांडव की विशेषताएं

  1. 1ऊपरी दाहिना हाथ: डमरू — सृष्टि का नाद, ब्रह्मांड की ध्वनि
  2. 2ऊपरी बायाँ हाथ: अग्नि — संहार, विनाश
  3. 3नीचे दाहिना हाथ: अभय मुद्रा — 'डरो मत, मैं रक्षक हूँ'
  4. 4नीचे बायाँ हाथ: गजहस्त मुद्रा — उठे हुए पाँव की ओर संकेत (मुक्ति का मार्ग)
  5. 5दाहिना पाँव: मुयलगन (अहंकार, माया) को दबाए हुए
  6. 6बायाँ पाँव: ऊपर उठा हुआ — मोक्ष/मुक्ति
  7. 7प्रभामंडल: अग्नि का वृत्त — ब्रह्मांड चक्र

पाँच कर्म (पंचकृत्य)

नटराज पाँच ब्रह्मांडीय क्रियाओं का प्रतीक है:

  1. 1सृष्टि (डमरू से)
  2. 2स्थिति (अभय मुद्रा)
  3. 3संहार (अग्नि से)
  4. 4तिरोधान (माया का आवरण)
  5. 5अनुग्रह (उठा पाँव — मोक्ष)

CERN का नटराज: जिनेवा में CERN (परमाणु अनुसंधान केंद्र) के प्रवेश द्वार पर नटराज की प्रतिमा स्थापित है — इसे ब्रह्मांड के 'cosmic dance of creation and destruction' का प्रतीक माना जाता है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, चिदंबरम मंदिर परंपरा, तमिल शैव आगम
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