विस्तृत उत्तर
नटराज शिव का नृत्यमुद्रा स्वरूप है — यह भारतीय कला और दर्शन का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।
नटराज का अर्थ
- ▸'नट' = नर्तक, 'राज' = राजा
- ▸शिव — नृत्य के स्वामी, सृष्टि के नर्तक
आनंद तांडव की विशेषताएं
- 1ऊपरी दाहिना हाथ: डमरू — सृष्टि का नाद, ब्रह्मांड की ध्वनि
- 2ऊपरी बायाँ हाथ: अग्नि — संहार, विनाश
- 3नीचे दाहिना हाथ: अभय मुद्रा — 'डरो मत, मैं रक्षक हूँ'
- 4नीचे बायाँ हाथ: गजहस्त मुद्रा — उठे हुए पाँव की ओर संकेत (मुक्ति का मार्ग)
- 5दाहिना पाँव: मुयलगन (अहंकार, माया) को दबाए हुए
- 6बायाँ पाँव: ऊपर उठा हुआ — मोक्ष/मुक्ति
- 7प्रभामंडल: अग्नि का वृत्त — ब्रह्मांड चक्र
पाँच कर्म (पंचकृत्य)
नटराज पाँच ब्रह्मांडीय क्रियाओं का प्रतीक है:
- 1सृष्टि (डमरू से)
- 2स्थिति (अभय मुद्रा)
- 3संहार (अग्नि से)
- 4तिरोधान (माया का आवरण)
- 5अनुग्रह (उठा पाँव — मोक्ष)
CERN का नटराज: जिनेवा में CERN (परमाणु अनुसंधान केंद्र) के प्रवेश द्वार पर नटराज की प्रतिमा स्थापित है — इसे ब्रह्मांड के 'cosmic dance of creation and destruction' का प्रतीक माना जाता है।





