विस्तृत उत्तर
अर्धनारीश्वर शिव का वह स्वरूप है जिसमें शरीर का आधा भाग पुरुष (शिव) और आधा भाग स्त्री (पार्वती) है।
दार्शनिक अर्थ
- 1पुरुष-प्रकृति का अभेद: शिव = पुरुष (चेतना), पार्वती = प्रकृति (ऊर्जा/शक्ति)। दोनों मिलकर सृष्टि संभव है — न शिव अकेले सृजन कर सकते हैं, न शक्ति।
- 1अद्वैत का प्रतीक: अर्धनारीश्वर यह दर्शाता है कि आत्मा (शिव) और माया (शक्ति) वास्तव में एक ही हैं — द्वैत भ्रम है।
- 1समानता का संदेश: स्त्री और पुरुष समान हैं — दोनों शिव के ही अंग हैं।
प्रतीक चिह्न
- ▸दायाँ अर्ध = शिव (जटा, नीलकंठ, त्रिशूल, सर्प)
- ▸बायाँ अर्ध = पार्वती (मुकुट, सोने के आभूषण, स्तन, हरित/लाल वस्त्र)
पौराणिक कथा
शिव पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि के लिए शिव से प्रार्थना की। शिव ने अपने शरीर को दो भागों में विभाजित किया — बाईं ओर पार्वती, दाईं ओर स्वयं — और सृष्टि के लिए प्रकृति और पुरुष तत्व पृथक किए।
स्थान: तिरुचेंगोड़ (तमिलनाडु), कांची, एलोरा गुफा (गुफा 21) में अर्धनारीश्वर की प्रसिद्ध मूर्तियां हैं।





