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शिव स्वरूप📜 शिव पुराण - रुद्र संहिता, लिंग पुराण, स्कंद पुराण2 मिनट पठन

शिव जी का अर्धनारीश्वर रूप क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

अर्धनारीश्वर में शिव का आधा शरीर शिव (पुरुष/चेतना) और आधा पार्वती (स्त्री/शक्ति) का है। यह पुरुष-प्रकृति का अभेद और अद्वैत का प्रतीक है — सृष्टि के लिए दोनों तत्व अनिवार्य हैं।

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विस्तृत उत्तर

अर्धनारीश्वर शिव का वह स्वरूप है जिसमें शरीर का आधा भाग पुरुष (शिव) और आधा भाग स्त्री (पार्वती) है।

दार्शनिक अर्थ

  1. 1पुरुष-प्रकृति का अभेद: शिव = पुरुष (चेतना), पार्वती = प्रकृति (ऊर्जा/शक्ति)। दोनों मिलकर सृष्टि संभव है — न शिव अकेले सृजन कर सकते हैं, न शक्ति।
  1. 1अद्वैत का प्रतीक: अर्धनारीश्वर यह दर्शाता है कि आत्मा (शिव) और माया (शक्ति) वास्तव में एक ही हैं — द्वैत भ्रम है।
  1. 1समानता का संदेश: स्त्री और पुरुष समान हैं — दोनों शिव के ही अंग हैं।

प्रतीक चिह्न

  • दायाँ अर्ध = शिव (जटा, नीलकंठ, त्रिशूल, सर्प)
  • बायाँ अर्ध = पार्वती (मुकुट, सोने के आभूषण, स्तन, हरित/लाल वस्त्र)

पौराणिक कथा

शिव पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि के लिए शिव से प्रार्थना की। शिव ने अपने शरीर को दो भागों में विभाजित किया — बाईं ओर पार्वती, दाईं ओर स्वयं — और सृष्टि के लिए प्रकृति और पुरुष तत्व पृथक किए।

स्थान: तिरुचेंगोड़ (तमिलनाडु), कांची, एलोरा गुफा (गुफा 21) में अर्धनारीश्वर की प्रसिद्ध मूर्तियां हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण - रुद्र संहिता, लिंग पुराण, स्कंद पुराण
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