विस्तृत उत्तर
नटराज शिव का वर्णन शिव पुराण और तमिल शैव आगम में मिलता है:
नटराज क्या है
नट' = नर्तक + 'राज' = राजा। नटराज = नृत्य का राजा। शिव जब सृष्टि की लय में नृत्य करते हैं तो वे 'नटराज' कहलाते हैं।
नटराज का प्रसिद्ध स्थान
चिदंबरम (तमिलनाडु) का नटराज मंदिर — यहाँ शिव 'आनंद तांडव' मुद्रा में विराजित हैं।
नटराज की चार भुजाओं का प्रतीकार्थ
- 1ऊपरी दाहिना हाथ — डमरू:
सृष्टि की ध्वनि — 'डमरू' की ध्वनि से सृष्टि उत्पन्न होती है। संस्कृत वर्णमाला के 14 सूत्र 'माहेश्वर सूत्र' डमरू से ही निकले (पाणिनि की परंपरा)।
- 1ऊपरी बायाँ हाथ — अग्नि:
प्रलय की अग्नि — सृष्टि का संहार। सृजन और संहार साथ-साथ।
- 1निचला दाहिना हाथ — अभयमुद्रा:
भक्तों को अभय दान — 'डरो मत।'
- 1निचला बायाँ हाथ — गजहस्त मुद्रा:
पैर की ओर इशारा — 'यहाँ शरण है।'
नटराज का एक पैर — अपस्मार
शिव अपने एक पैर से 'अपस्मार' नामक बौने दानव को दबाए हैं। अपस्मार = अज्ञान और भ्रम का प्रतीक। शिव का नृत्य अज्ञान को कुचलकर होता है।
उठा हुआ पैर
ऊपर उठा पैर = मोक्ष का द्वार — जो शिव की शरण में है, उसे मोक्ष मिलता है।
प्रभामंडल (Aura Ring)
नटराज के चारों ओर अग्नि का गोलाकार प्रभामंडल = ब्रह्मांड का चक्र।
आधुनिक महत्व
CERN (Geneva) के परिसर में नटराज की प्रतिमा स्थापित है — इसे ब्रह्मांडीय नृत्य और ऊर्जा चक्र के प्रतीक के रूप में।





