विस्तृत उत्तर
पांचजन्य भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का दिव्य शंख है जिसे विजय और धर्म का प्रतीक माना जाता है। यह अत्यंत दुर्लभ और पवित्र शंख है।
पांचजन्य शंख की उत्पत्ति के विषय में दो मुख्य कथाएं मिलती हैं। पहली — यह समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्नों में छठे रत्न के रूप में प्रकट हुआ था और भगवान विष्णु ने इसे धारण किया। दूसरी और अधिक प्रचलित कथा — श्रीकृष्ण और बलराम गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के बाद गुरुदक्षिणा में गुरुपुत्र पुनरदत्त को वापस लाने गए। पुनरदत्त को शंखासुर नामक राक्षस उठा ले गया था जो समुद्र के तल में एक शंख में रहता था। श्रीकृष्ण ने शंखासुर का वध किया और उस शंख को अपने पास रख लिया — यही पांचजन्य कहलाया।
महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में श्रीकृष्ण ने इसी पांचजन्य शंख से युद्ध की घोषणा की। इसकी ध्वनि इतनी प्रचंड थी कि कौरव सेना में भय व्याप्त हो जाता था। पांचजन्य गीता के प्रथम श्लोक में भी उल्लिखित है।
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