विस्तृत उत्तर
बांसुरी (वेणु) = कृष्ण का सबसे प्रिय वाद्य — गहरा आध्यात्मिक प्रतीक
- 1बांसुरी = खाली बांस। भीतर से पूर्णतः खाली (शून्य) — अहंकार शून्य। जब जीव अहंकार त्यागे = ईश्वर (कृष्ण) उसमें से दिव्य संगीत बजाते।
- 2छेद = घाव/कष्ट। बांसुरी में छेद = जीवन के कष्ट। कष्ट बिना = संगीत नहीं। दुःख = बांसुरी बनने की प्रक्रिया।
- 3कृष्ण होंठ: बांसुरी = कृष्ण होंठों से लगी = ईश्वर से निकटतम। समर्पित आत्मा = ईश्वर निकट।
- 4ध्वनि = आकर्षण: बांसुरी ध्वनि = गोपियाँ सब छोड़कर दौड़ीं = ईश्वर पुकार = आत्मा बेचैन।





