विस्तृत उत्तर
मंत्र जप → आत्म शुद्धि:
- 1संस्कार दहन: जप अग्नि = पूर्व जन्मों के कर्म संस्कार (वासना) जलते हैं — 'नामाग्निः सर्वपापानां दहतीति' — नाम अग्नि सर्व पाप दहन।
- 2चित्त शुद्धि: विचार → शब्द → कर्म। मंत्र जप = विचार शुद्ध → कर्म शुद्ध → आत्मा प्रकाशित।
- 3माया पर्दा: आत्मा = स्वयं शुद्ध (वेदांत)। माया/अज्ञान = पर्दा। जप = पर्दा हटाना → आत्मा स्वयं प्रकाशित।
- 4ईश्वर नाम = ईश्वर: 'नाम' और 'नामी' में भेद नहीं — मंत्र जप = ईश्वर संपर्क → आत्मा शुद्ध।
- 5प्रत्याहार: जप = इंद्रियां अंतर्मुखी → बाहरी विकार से मुक्ति।





