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मंत्र जप दर्शन📜 वेदांत दर्शन, योग शास्त्र, भक्ति1 मिनट पठन

मंत्र जप से आत्मा की शुद्धि कैसे होती है?

संक्षिप्त उत्तर

संस्कार दहन (कर्म वासना)। विचार शुद्ध → कर्म शुद्ध। माया पर्दा हटाना (वेदांत: आत्मा स्वयं शुद्ध)। नाम = नामी = ईश्वर संपर्क। इंद्रियां अंतर्मुखी।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप → आत्म शुद्धि:

  1. 1संस्कार दहन: जप अग्नि = पूर्व जन्मों के कर्म संस्कार (वासना) जलते हैं — 'नामाग्निः सर्वपापानां दहतीति' — नाम अग्नि सर्व पाप दहन।
  2. 2चित्त शुद्धि: विचार → शब्द → कर्म। मंत्र जप = विचार शुद्ध → कर्म शुद्ध → आत्मा प्रकाशित।
  3. 3माया पर्दा: आत्मा = स्वयं शुद्ध (वेदांत)। माया/अज्ञान = पर्दा। जप = पर्दा हटाना → आत्मा स्वयं प्रकाशित।
  4. 4ईश्वर नाम = ईश्वर: 'नाम' और 'नामी' में भेद नहीं — मंत्र जप = ईश्वर संपर्क → आत्मा शुद्ध।
  5. 5प्रत्याहार: जप = इंद्रियां अंतर्मुखी → बाहरी विकार से मुक्ति।
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शास्त्रीय स्रोत
वेदांत दर्शन, योग शास्त्र, भक्ति
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