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विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण के बाद आत्मा प्रेतत्व को त्यागकर पितरों के साथ विलीन हो जाती है। इस कृत्य के पूर्ण होते ही आत्मा आधिकारिक रूप से पितृलोक की परिधि में प्रवेश करने या यमलोक की यात्रा के लिए तत्पर हो जाती है। बारहवें या तेरहवें दिन के इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान के बाद तेरहवें दिन आत्मा का अपने लौकिक निवास से संबंध विच्छेद हो जाता है और यमदूत उसे यममार्ग की ओर ले जाते हैं।
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