विस्तृत उत्तर
भगवान के स्थूल रूप को जगदाकार रूप के रूप में समझाया गया है, लेकिन साथ ही यह भी बताया गया है कि चिन्मय भगवान प्राकृत स्वरूप से रहित हैं। उनका जो स्थूल जगदाकार रूप कहा जाता है, वह उनकी माया के महत्तत्त्व आदि गुणों से भगवान में ही कल्पित है। उदाहरण दिया गया है कि बादल वायु के आश्रय रहते हैं और धूसरता धूल में होती है, फिर भी अल्पबुद्धि मनुष्य बादलों को आकाश में और धूसरता को वायु में आरोपित करते हैं। इसी तरह अविवेकी व्यक्ति सबके साक्षी आत्मा में स्थूल दृश्य जगत का आरोप कर देता है। इसलिए स्थूल रूप का अर्थ भगवान का सीमित भौतिक शरीर नहीं, बल्कि माया से कल्पित विश्व-रूप की धारणा है।
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