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मंत्र जप दर्शन📜 पतंजलि योग सूत्र, भक्ति दर्शन1 मिनट पठन

मंत्र जप से समाधि अवस्था कैसे प्राप्त होती है?

संक्षिप्त उत्तर

योग सूत्र: 'तज्जपस्तदर्थभावनम्'। जप(धारणा)→ध्यान(एक धारा)→समाधि(मंत्र+मन+देवता=एक)। सविकल्प→निर्विकल्प। चैतन्य/मीरा = नाम→भाव समाधि। वर्षों अभ्यास। गुरु = त्वरित।

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विस्तृत उत्तर

जप → समाधि मार्ग:

पतंजलि (योग सूत्र 1.28): 'तज्जपस्तदर्थभावनम्' — मंत्र जप + उसके अर्थ का भावन = ईश्वर साक्षात्कार।

क्रम

  1. 1जप (धारणा): मंत्र पर ध्यान = एकाग्रता।
  2. 2ध्यान: निरंतर एकाग्रता = ध्यान — मंत्र + मन = एक धारा।
  3. 3समाधि: ध्यान इतना गहन कि मंत्र, मन, देवता = तीनों एक = समाधि।
  4. 4सविकल्प: 'मैं जप कर रहा हूं' = अभी भेद।
  5. 5निर्विकल्प: 'मैं' भी नहीं — केवल ब्रह्म/देवता = पूर्ण समाधि।

भक्ति मार्ग: चैतन्य/मीरा/रामकृष्ण = नाम जप → भाव समाधि — प्रेम इतना तीव्र कि बाह्य जगत विस्मृत।

अवधि: वर्षों का नियमित अभ्यास। गुरु कृपा = त्वरित।

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शास्त्रीय स्रोत
पतंजलि योग सूत्र, भक्ति दर्शन
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