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विस्तृत उत्तर
इस कथा के अनुसार महाप्रलय में आत्माएँ नष्ट नहीं होतीं। केवल उनके स्थूल शरीर और बाहरी पहचान लीन हो जाती है। आत्माएँ अपने कर्म-संस्कारों के साथ परमात्मा की अव्यक्त चेतना में विश्राम करती हैं। जब सृष्टि फिर शुरू होती है, तब वे अपने कर्मों के अनुसार नई यात्रा आरंभ करती हैं।
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