विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय विवेचन में तपोलोक का वर्णन तीन स्तरों पर किया गया है। आधिभौतिक स्तर पर तपोलोक ब्रह्मांड में एक निश्चित दूरी पर स्थित वास्तविक लोक है, जो जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर बताया गया है। आधिदैविक स्तर पर यह वैराज नामक अयोनिज और दाह-मुक्त देवगणों का नित्य निवास स्थान है। आध्यात्मिक स्तर पर तपोलोक मनुष्य के शरीर में आज्ञा चक्र और चेतना की अत्यंत उच्च, विकाररहित और शुद्ध अवस्था का प्रतीक है। इस प्रकार तपोलोक बाहरी ब्रह्मांड, देवशक्ति और आंतरिक योगिक चेतना तीनों स्तरों पर समझाया गया है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





