विस्तृत उत्तर
कथा (भागवत 10.80-81): सुदामा = कृष्ण बालसखा, अत्यंत गरीब। पत्नी ने कहा — 'कृष्ण से मदद माँगो।' सुदामा = संकोच, पर गए द्वारका। भेंट = मुट्ठी चावल (पोहा)।
कृष्ण ने = राजमहल में सम्मान, चावल खाए (2 मुट्ठी, तीसरी रुक्मिणी ने रोकी — 'और देंगे तो 3 लोक दे देंगे')। सुदामा = कुछ माँगे बिना लौटे। घर पहुँचे = झोपड़ी → महल। कृष्ण ने बिना माँगे सब दे दिया।
शिक्षा: सच्ची मित्रता = धन-पद नहीं देखती। भक्ति = बिना माँगे मिलती। मुट्ठी चावल = करोड़ लौटे = भक्ति का प्रतिफल। ईश्वर से माँगो मत, प्रेम दो = सब मिलेगा।





