विस्तृत उत्तर
परशुराम द्वारा श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र देने की कथा एक महत्वपूर्ण पौराणिक प्रसंग है।
प्रसंग — कंस-वध के बाद श्रीकृष्ण पर जरासंध के आक्रमण बढ़ गए थे। अधर्म का बोझ भी बढ़ रहा था। कृष्ण धर्म की स्थापना के लिए मथुरा से निकले और परशुराम के आश्रम पहुँचे।
दीक्षा और कारण — परशुराम ने श्रीकृष्ण को आचमन कराकर सुदर्शन की दीक्षा दी और कहा — 'आज से मेरे इस सुदर्शन चक्र के अधिकारी तुम हो। इस चक्र की जन्मकथा तो तुम जानते ही हो — पहले यह शिव के पास था, शिव से विष्णु को, विष्णु से अग्नि को, अग्नि से वरुण को और वरुण से मुझे मिला।'
कारण — परशुराम जानते थे कि श्रीकृष्ण स्वयं भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार हैं। यह चक्र मूलतः विष्णु का ही था। साथ ही द्वापर के धर्म-संकट में इस चक्र का उपयोग अधर्मियों के वध के लिए होना था। बलराम के हल से भूमि में बीज बोने थे और कृष्ण के सुदर्शन से भूमि की रक्षा करनी थी।





