विस्तृत उत्तर
जब भगवान श्री कृष्ण ने भगदत्त के वैष्णवास्त्र को स्वयं अपनी छाती पर ले लिया तो एक अद्भुत और दिव्य घटना हुई। श्री कृष्ण के स्पर्श से वह दिव्यास्त्र एक वैजयंती माला में परिवर्तित होकर उनके गले में सुशोभित हो गया। यह इसलिए हुआ क्योंकि श्री कृष्ण स्वयं नारायण (विष्णु) के अवतार थे और वैष्णवास्त्र उन्हीं का अपना अस्त्र था। यह घटना श्री कृष्ण की भगवत्ता का एक अद्भुत प्रमाण है और यह भी सिद्ध करती है कि वैष्णवास्त्र केवल विष्णु या उनके अवतार द्वारा ही निष्क्रिय किया जा सकता था।
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