विस्तृत उत्तर
कथा (भागवत): गोवर्धन पर्वत पर कृष्ण बांसुरी बजा रहे — मोर नाचने लगे। नृत्य पूर्ण → मोरों ने अपने पंख कृष्ण चरणों में अर्पित (प्रेम+कृतज्ञता)। कृष्ण ने मुकुट पर धारण किया।
आध्यात्मिक
- 1मोर पंख = 'आँख' (Eye) — ज्ञान नेत्र, सर्वद्रष्टा।
- 2मोर = वर्षा (प्रेम) में नाचता — कृष्ण = प्रेम स्वरूप।
- 3सरलता: सोना-हीरा नहीं = प्रकृति का पंख = सादगी। ईश्वर = सरल प्रसाद प्रिय।
- 4मोर = राष्ट्रीय पक्षी — कृष्ण = भारत की आत्मा।
सार: जो प्रेम से अर्पित = कृष्ण मुकुट पर धारण। पंख = प्रेम, सोना = नहीं।





