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विस्तृत उत्तर
तीन प्रकार के दुःख आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक बताए गए हैं। पाठ में इन्हें सहज दुःख कहा गया है। इसके साथ दुःख की व्याख्या भी दी गई है कि इच्छाविघात के कारण चित्त में जो विक्षोभ उत्पन्न होता है, वही दुःख है। इसलिए यहाँ दुःख केवल बाहरी पीड़ा नहीं, बल्कि इच्छा की बाधा से उत्पन्न चित्त-विक्षोभ भी है। ये दुःख योगाभ्यास में विघ्नरूप हो सकते हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 52, श्लोक 8-9
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