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विस्तृत उत्तर
योग साधना में व्याधि का अर्थ शरीरगत विकारों से है। पाठ में धातुवैषम्य यानी धातुओं के न्यूनाधिक्य के कारण होने वाले विकार, क्रिया से होने वाले विकार और वात-पित्त आदि दोषों से उत्पन्न विकार व्याधि कहे गए हैं। योगाभ्यास के समय व्याधिपीड़ा साधक को रोकती है। इसलिए व्याधि योगमार्ग में शरीर की असंतुलित स्थिति से उत्पन्न बाधा है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 51, श्लोक 1-4
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