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विस्तृत उत्तर
योग की बाधाएँ अत्यन्त उत्साह से अभ्यास करने पर दूर होती हैं। पाठ में आलस्य, व्याधि, प्रमाद, संशय, अश्रद्धा, दौर्मनस्य और विषयलोलता जैसे विघ्न बताए गए हैं। फिर कहा गया है कि अत्यन्त उत्साह से युक्त होकर अभ्यास करने वाले साधक की ये बाधाएँ दूर हो जाती हैं, इसमें संशय नहीं। बाधाओं के समाप्त होने के बाद भी नाना प्रकार के उपसर्ग उत्पन्न हो सकते हैं, इसलिए अभ्यास निरंतर चाहिए।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 52, श्लोक 11-13
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