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विस्तृत उत्तर
विषयलोलता योग में बाधा है क्योंकि यह अयोग्य विषयों में हठपूर्वक आसक्ति है। पाठ में कहा गया है कि योग्य और अयोग्य जानने पर भी अयोग्य विषयों के प्रति ज़िद से लगाव रखना विषयलोलता है। योगियों की साधना में इसे विघ्नरूप कहा गया है। अत्यन्त उत्साह से अभ्यास करने वाले साधक की ये बाधाएँ दूर हो जाती हैं। इसलिए विषयलोलता का उपाय दृढ़ अभ्यास और उत्साह है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 52, श्लोक 11-12
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